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कुदरत

Posted On 19 Apr, 2016 Junction Forum, कविता में

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#क्या खेल है इस कुदरत की जब आपको किसी की सबसे ज्यादा जरुरत होती है ..
तब उस वक़्त कोई आपके साथ नहीं रहता..
जानते है की इस धरती पर अकेला आना और अकेला जाना कुदरत का खेल है ..
फिर भी अगर ये खेल है तो..
हर वक़्त हार हमारी क्यों….
#क्या खेल है इस कुदरत की कभी मिलाता भी यही है और दूर भी यही करता है..
तब उस वक़्त कोई आपके साथ नहीं रहता..
जानते है की इस धरती पर मिलना और बिछडना तो पौराणिक काल से चलता आ रहा है..
फिर भी अगर ये खेल है तो..
हर वक़्त हार हमारी क्यों….
#क्या खेल है इस कुदरत की कभी ख़ुशी भी यही देता है और दुःख भी यही देता है..
तब उस वक़्त कोई आपके साथ नहीं रहता..
जानते है की इस धरती पर ख़ुशी और दुःख सिक्के के दो पहलु है..
फिर भी अगर ये खेल है तो..
हर वक़्त हार हमारी क्यों….
# क्या खेल है इस कुदरत की ज़िन्दगी भी यही देता है और मौत भी यही देता है..
तब उस वक़्त कोई आपके साथ नहीं रहता..
जानते है की इस धरती पर जीवन और मरण समय के पहिये जैसा है..
फिर भी अगर ये खेल है तो..
हर वक़्त हार हमारी क्यों..

Web Title : Maa

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Lily Tandon के द्वारा
April 23, 2016

अच्छी ही होती है कुदरत की हर बात.

sanmitadeo के द्वारा
April 23, 2016

जी लिली जी बहुत ही जयदा अच्छी होती है..अपनी भूल भुलैया में सभी लोगो का एंटरटेनमेंट करती है..और कभी खुश कभी दुखी होकर लोग अपनी सारी ज़िन्दगी गुज़ार देते है

sadguruji के द्वारा
April 24, 2016

आदरणीया स्मिता जी ! नयापन लिए हुए अच्छी कविता ! बहुत बहुत अभिनन्दन और बधाई ! हमारी हार भी खेल का ही एक हिस्सा है ! सादर आभार !

sanmitadeo के द्वारा
April 25, 2016

धन्यावाद सद्गुरु जी हार और जीत तो हमारी ज़िन्दगी में आती जाती रहती है अगर ये न रहे तो ज़िन्दगी नीरस हो जाएगी.


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