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ज़िन्दगी के तौह्फे

Posted On: 1 Jul, 2017 Junction Forum में

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@ खुद को सताते हैं ,,बहलाते है …
एक छोटे बच्चे की तरह ….
उम्मीदों को खिलौना बनाते है…
जिये जा रहे है …
इस समाज के घनचक्कर से इरादों पर ….
ना ही कोई साथ है ना कोई सहारा..
बस एक हम है…और हमारे लिए तौह्फे में ताने…
@ खुद को तड़पाते है,,शम्भालते है..
एक छोटे बच्चे की तरह
सब कुछ भूल कर खिलखिलाते है…
छुपाये जा रहे है …
इस समाज से खुद की ख्वाइशें
ना ही कोई भरोसा है ना कोई अफ़सोस..
बस एक हम है और हमारे लिए तौह्फे में मजाक..
@ खुद को खामोश रखते है, मनाते है ..
एक छोटे बच्चे की तरह ..
हर छोटी सी ख़ुशी को एक बड़ी उम्मीद समझते है ..
नजरअंदाज किये जा रहे है …
इस समाज की हर एक शातिर सी चाल ..
ना ही कोई हमसफ़र है ना कोई साथी …
बस एक हम है और हमारे लिए तौह्फे में आजमाइश ….
@ खुद को समझते है खुश रखते है
एक छोटे बच्चे की तरह ..
हर रंजिशों को अपनाते है ..
फिसलते जा रहे है ..
इस समज की बेड़ियों की ओर ..
ना ही कोई गुज़ारिश है ना कोई सिफारिस ..
बस एक हम है और हमारे लिए तौह्फे में समझौता….

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